Sunday, 23 March 2014

संत महिमा

विधि-हरि-हर-कवि-कोविद-वाणी।।
कहत साधू महिमा सिकुचानी।।
ओ मोसन कही जात न कैसे।।
शाक-वनिक-मुनि-गुनी-जन जैसे।।

विधि=ब्रह्मा,

हरि=विष्णू,

हर=महादेव,

कवि=कवि,

कोविद=पंडित,

वाणी=सरस्वती,

ये भी
साधू संतो की महिमा
करने में संकोचते है।

मै
साधारण सामान्य व्यक्ति
ऐसे महान साधू-संतो के गुण
किस प्रकार से गाऊ ?
वर्णन करु ?

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