विधि-हरि-हर-कवि-कोविद-वाणी।।
कहत साधू महिमा सिकुचानी।।
ओ मोसन कही जात न कैसे।।
शाक-वनिक-मुनि-गुनी-जन जैसे।।
विधि=ब्रह्मा,
हरि=विष्णू,
हर=महादेव,
कवि=कवि,
कोविद=पंडित,
वाणी=सरस्वती,
ये भी
साधू संतो की महिमा
करने में संकोचते है।
मै
साधारण सामान्य व्यक्ति
ऐसे महान साधू-संतो के गुण
किस प्रकार से गाऊ ?
वर्णन करु ?
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