⊙मिशन सतस्वरुप⊙
प्रश्न- यह मिशन सतस्वरुप किसने और कब शुरू किया है ?
यह मिशन सतस्वरुप आदि सतगुरू, सर्व आत्माओंके सतगुरु,सर्व श्रृष्टि के सतगुरु, सतगुरु सुखरामजी महाराज ने इस श्रृष्टि की रचना हुयी तबसे शुरू किया।
आदिसे (जबसे सृष्टी निर्माण हुई)है। ब्रम्हा, विष्णू, महादेव, शक्ती, शेष सब सतस्वरुप परमात्मा का आधार लेके इस सृष्टी मे अपना अपना कार्य पूरा कर रहे है।
उन्होंने फैलाया हुआ माया जाल छेद कर जिवोको हंसो को अमर लोक (सतस्वरुप आनंद्पद) में ले जाने के लिए आदि श्रृष्टि रचना से लेकर आज तक हर युगमे 'आदि सतगुरू जी महाराज साहेब' आते है।
यह सतस्वरुप का विज्ञान जिवोंतक पहुचाते है। उन्हे भवसागरसे निकालकर अमरलोकमे लेके जाते है।
ऎसेही इस कलजुग मे "आदि सतगुरू सुखरामजी महाराज "राजस्थान मे (भरतखंडमे) 'जोधपुर' जिलामे बिराही' गावमे ब्राम्हण कुलमे सन १८७३ मे आये।
आदि सतगुरू महाराज गर्भवास मे नही आये बल्की "सुखराम" नामके बालक के देहमे (जब बालक का शारीर छुट गया तो) सतस्वरुप (अमरलोक) आनंद्पद से आकर प्रवेश किया तब उस सुखराम नाम के बालक के देह में चेतनता आ गयी।
पश्चात् आदि सतगुरु महाराज ने अखंडीत रुप से अठरा साल तक एक पत्थरपर बैठकर सतस्वरुप परमात्मा की भक्ती (रामनाम का भेदसहित सुमिरण) की और घट में ही ने:अन्छर की प्राप्ति करके नब्बे साल तक रहकर सव्वा लक्ष जीवोंको परम मोक्ष मे लेके गये।
अभी भी उनका सत्ता रुपसे कार्य शुरु है इसकी अनुभूति आप स्वयं श्वास उश्वास में भजन करके अपने शरीर में ही ले सकते हो। आपको तिलभर भी इधर उधर खोजना नही है।
©
॥ राम राम सा॥
।। सतस्वरुप-आनंद्पद-ने:अन्छर-निजनाम ग्रन्थ से।।
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