Thursday, 21 November 2013

सब सुख दाता "राम"

सभ सुख दाता रामु है
दूसर नाहिन कोइ॥
कहु नानक सुनि रे मना
तिह सिमरत गति होइ ॥

अर्थ- परमात्मा सब सुख देने वाला है , उसके अतिरिक्त कोई दुसरा नही । गुरू नानक निर्देश करते है कि हे मन ! उसका सुमिरन करने से ही मुक्ति होती है।

जिह सिमरत गति पाईऎ
तिह भजु रे तै मीत ॥
कहु नानक सुनु रे मना
अउध घटत है नीत ।।

अर्थ- हे मित्र ! जिसका सुमिरन करने से मुक्ति प्राप्त होती है,उसी का तुम किर्तीगान करो । गुरू नानक कहते है कि हे मन ! मेरी बात सुन , जिंदगी हर रोज घट रही है।

पांच तत्त को तनु रचिओ
जानहु चतुर सुजान ॥
जिह ते उपजिओ नानका
लीन ताहि मै मानु॥

अर्थ- हे चतुर व्यक्तियो ! यह जान लो कि ईश्वर ने पाँच तत्वों से तन की रचना की है । नानक का कथन है कि यह अच्छी तरह मान लो, जिससे उत्पन्न हुए हो , उसी में विलीन हो जाना है ॥

......................गुरू ग्रंथ साहिब.........राम राम 

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