Monday, 18 November 2013

श्वास....

दादू ऐसे महँगे मोलका, एक श्वास जे जाय ।
चौदह लोक समान सो, काहे रेत मिलाय ॥

दृष्टांत -
कश्यप चौदह लोक का,
श्वास सटे दे राज।
जाट खेत का दूसरा,
लाल गमाई बाज ॥
 (बाज- व्यर्थ)

कश्यप ऋषि के देहान्त का समय आया तो देवता आदि ने कहा सेवा बतावें ।
कश्यप- मेरी आयु बढ़ा दो ।
देवतादि- यह तो हम नहीं कर सकते ।
कश्यप- एक श्वास ही दे दो ।
तब भी सब मौन ही रहे ।
तब कश्यप ने कहा-
देखो, श्वास इतना अमूल्य हैकि चौदह लोकों का राज्य देने पर भी नहीं मिलता है।
इससे एक श्वास इतना अमूल्य है कि कीमत चौदह लोकों के मूल्य सेभी अधिक है ।
एसे श्वासों को तुम विषय भोग रुप रेत मेंक्यों मिलाते हो ?
अर्थात प्रत्येक श्वास के साथ राम नाम का सुमिरन भजन
करना चाहिये ।

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