सरब किसब न्यारा करे ,
अन्न सकल ले आण ।
ईऊँ करणी सिवरण ध्यान लग ,
पूरण ब्रह्म पिछाण ।।
पूरण ब्रह्म पिछाण ,
अन्न सू खुद्या जावे ।
सुण फिर लागे भूख ,
ब्रह्म होय ईऊं गरभ आवे ।।
सुखराम उपाया भजन लग ,
सब एकी कर जाण ।
सरब किसब न्यारा करे ,
अन्न सकल ले आण ।।
अर्थ......
अलग अलग करम कर के सभी जन अन्न घर पर लाते हैं , और अपनी अपनी भूख शान्त करते हैं । एसे ही जगत में सभी जन अलग अलग भक्तियां कर के पूरण ब्रह्म याने पारब्रह्म तक की प्राप्ति कर सकते हैं । जैसे
खाना खाने से भूख कुछ समय
तक मिटती हैं ठीक ऐसे ही
कुछ समय की विश्रांति के बाद वापस गरभ में आना पड़ता हैं । जन्म मरण मिटता नही। इसलिए सतस्वरूप की भक्ति करो जन्म मरण मिटाओ।
© सतस्वरुप आनंद पद ने:अन्छर निजनाम ग्रंथ से
अन्न सकल ले आण ।
ईऊँ करणी सिवरण ध्यान लग ,
पूरण ब्रह्म पिछाण ।।
पूरण ब्रह्म पिछाण ,
अन्न सू खुद्या जावे ।
सुण फिर लागे भूख ,
ब्रह्म होय ईऊं गरभ आवे ।।
सुखराम उपाया भजन लग ,
सब एकी कर जाण ।
सरब किसब न्यारा करे ,
अन्न सकल ले आण ।।
अर्थ......
अलग अलग करम कर के सभी जन अन्न घर पर लाते हैं , और अपनी अपनी भूख शान्त करते हैं । एसे ही जगत में सभी जन अलग अलग भक्तियां कर के पूरण ब्रह्म याने पारब्रह्म तक की प्राप्ति कर सकते हैं । जैसे
खाना खाने से भूख कुछ समय
तक मिटती हैं ठीक ऐसे ही
कुछ समय की विश्रांति के बाद वापस गरभ में आना पड़ता हैं । जन्म मरण मिटता नही। इसलिए सतस्वरूप की भक्ति करो जन्म मरण मिटाओ।
© सतस्वरुप आनंद पद ने:अन्छर निजनाम ग्रंथ से
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