सतस्वरुप आनंदपद ग्रन्थ
समझ समझ प्राणिया जो मोख चहिये,
ऐसी भगत गहें रहिए बे,
सतगुरु शरणों धार सिस पर,
राम राम मुख लहिये बे।।
आदि सतगुरूजी महाराज साहेब जगत के सभी नर नारियों से कह रहे हैं कि हे प्राणि तू समझ अगर तुझे परम मोक्ष (सतस्वरुप आनंद पद) चाहिए तो मैं जो भक्ति(सतस्वरुपी राम की) तुझे कहता हूं वो तू कर। उसके लिए तुझे सतस्वरुपी सतगुरु का शरणा लेना होगा। मतलब हंस के निज मन से सतगुरु के शरण मे जाना होगा। ऐसे सतगुरु का शरणा लेने के बाद सतगुरु विधि द्वारा धारों धार राम भजन करना पडेगा, तब तुझे परम मोक्ष की प्राप्ति होगी।
समझ समझ प्राणिया जो मोख चहिये,
ऐसी भगत गहें रहिए बे,
सतगुरु शरणों धार सिस पर,
राम राम मुख लहिये बे।।
आदि सतगुरूजी महाराज साहेब जगत के सभी नर नारियों से कह रहे हैं कि हे प्राणि तू समझ अगर तुझे परम मोक्ष (सतस्वरुप आनंद पद) चाहिए तो मैं जो भक्ति(सतस्वरुपी राम की) तुझे कहता हूं वो तू कर। उसके लिए तुझे सतस्वरुपी सतगुरु का शरणा लेना होगा। मतलब हंस के निज मन से सतगुरु के शरण मे जाना होगा। ऐसे सतगुरु का शरणा लेने के बाद सतगुरु विधि द्वारा धारों धार राम भजन करना पडेगा, तब तुझे परम मोक्ष की प्राप्ति होगी।
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