Sunday, 27 November 2016

सास और बहू .....

नई नवेली दुल्हन जब
ससुराल में आई तो उसकी
सास बोली :बींदणी कल
माता के मन्दिर में
चलना है।

बहू ने पूछा : सासु माँ एक
तो ' माँ ' जिसने मुझ जन्म
दिया और एक ' आप ' हो
और कोन सी माँ है ?

सास बडी खुश हुई कि मेरी
बहू तो बहुत सीधी है ।
सास ने कहा - बेटा पास के मन्दिर में दुर्गा माता है
सब औरतें जायेंगी हम भी चलेंगे ।

सुबह होने पर दोनों एक साथ मन्दिर जाती है ।
आगे सास पीछे बहू ।
जैसे ही मन्दिर आया तो बहू ने मन्दिर में गाय की मूर्ति को देखकर
कहा : माँ जी देखो ये गाय का बछड़ा दूध पी रहा है ,
मैं बाल्टी लाती हूँ और दूध निकालते है ।
सास ने अपने सिर पर हाथ पीटा कि बहू तो " पागल " है और
बोली :-,बेटा ये स्टेच्यू है और ये दूध नही दे सकती।

चलो आगे ।

मन्दिर में जैसे ही प्रवेश किया तो एक शेर की मूर्ति दिखाई दी ।
फिर बहू ने कहा - माँ आगे मत जाओ ये शेर खा जायेगा
सास को चिंता हुई की मेरे बेटे का तो भाग्य फूट गया ।
और बोली - बेटा पत्थर का शेर कैसे खायेगा ?

चलो अंदर चलो मन्दिर में, और

सास बोली - बेटा ये माता है और इससे मांग लो , यह माता तुम्हारी मांग पूरी करेंगी ।

बहू ने कहा - माँ ये तो पत्थर की है ये क्या दे सकती है ? ,
जब पत्थर की गाय दूध नही दे
सकती ?
पत्थर का बछड़ा दूध पी नही सकता ?
पत्थर का शेर खा नही सकता ?
तो ये पत्थर की मूर्ति क्या दे सकती है ?
अगर कोई दे सकती है तो आप ......... है
" आप मुझे आशीर्वाद दीजिये " ।

तभी सास की आँखे खुली !
वो बहू पढ़ी लिखी थी,
तार्किक थी,
जागरूक थी ,
तर्क और विवेक के सहारे
बहु ने सास को जाग्रत कर दिया !
अगर
सही भक्ति एवम् मानवता की
प्राप्ति करनी है तो पहले असहायों ,
ज्ञान में भटके हुऐ जरुरतमंदों , गरीबो की सेवा करो
परिवार , समाज में लोगो की मदद करे ।
"अंधविश्वास और पाखण्ड
को हटाना ही मानव सेवा है "

संग्रहित .....

शानू पंडित
09765282928
09423492193
पुणे - महाराष्ट्र

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