Saturday, 26 November 2016

बिना भजन "सुखराम" कहे ....

व्रत बास एकादशी, करता है निर्धार ।।
बिना भजन सुखराम जी, कदेन पूतन हार ll २९ ll

दान पुन्न जिग बोहो कियो, कंचन तुला चढ़ाय ll
बिना भजन सुखराम जी, धाम कदे नही जाय ll ३० ll
_________________ll घटपरचा ll

आदि सतगुरुजी महाराज कहते है
मनुष्य दान पूण्य व्रत उपवास यज्ञ एकादशी
यह निर्धार करके करता है
इतना ही नही की स्वर्ण तुला भी करले और
उसको भी बाँट दे उसका भी दान करवा दे
लेकिन "भजन" के अलावा उसे परममोक्ष प्राप्त नही होगा
वह अमरलोकधाम नही पहुंचेगा ।

•भजन = आदि सतगुरुजी महाराज ने बताई हुयी विधियुक्त सुमिरन

© सतस्वरूप आनंदपद ने:अंछर निजनाम ग्रन्थ

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शानू पंडित
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रामद्वारा पुणे - मिशन सतस्वरूप

ll राम राम सा ll

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