⊙ मिशन सतस्वरुप ⊙
।। सुखविलास।।
मारग माहि देखकर।
पाया सुखविलास।।
ओ साझन 'सुखराम' कहें।
सिंवरो साँस उसांस।।
सूरत शिखर में रम रही।
ररंकार सु बात।।
ओ समियो 'सुखराम' कहें।
जन्म मरण लग साथ।।
आदि सतगुरुजी महाराज साहेब कहते है की....मेरी सूरत शिखर में रमण कर रही है और ररंकार से बात कर रही है। ऐसा समय मेरे जन्म से मरने तक रहेगा और परममोक्ष के रास्ते में मैंने यह सारा 'सुख विलास' देखा और यह सब मुझे इसलिए मिला क्योंकि मैंने श्वास उश्वास में 'सतस्वरुपी राम' नाम का सुमिरन किया। इस समूचे विश्व में 'जीवित अवस्था में परममोक्ष' का यही एकमात्र साधन है और इस सृष्टि अन्य कोई साधन नहीं है।
।। राम राम सा।।
।। आदि सतगुरुजी महाराज साहेब।।
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